यूँ तो सभी जानते है कि सनातन धर्म में भाई बहिन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक भाई दूज का परम्परगत पर्व साल में एक बार बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है, ये भी सर्व विदित है कि मथुरा में कार्तिक शुक्ला यम द्वितीया को यमुना के एकमात्र तीर्थ विश्राम घाट पर साल में एक बार यम फंदा से निवृत्ति के लिए भाई बहिन साथ में स्नान करते है. इस परम्परागत आयोजन के लिए करोडो श्रद्धालु अपनी आस्था श्रद्धा के साथ प्रति वर्ष आते है, लेकिन भारत के एक मात्र इस पर्व को अभी तक राजकीय मेले का दर्जा नहीं मिला, ऐसा नहीं है कि इसकी मांग नहीं उठी हो, आपको बता दें कि समय समय पर विभिन्न संगठन और व्यक्तियों ने इसके लिए प्रयास किया, किन्तु पूर्ण जानकारी के अभाव में नतीजा शून्य रहा, यानि नगर पालिका परिषद से निगम बन गया, लेकिन इस दिशा में कुछ भी हासिल नहीं हुआ, इस बाबत पत्रकार गोपाल चतुर्वेदी ने आर टी आई के माध्यम से जिला प्रशासन से जानकारी मांगी, जिसमें अवगत कराया गया कि, राजकीय मेला का प्रस्ताव उस क्षेत्र की नगर पंचायत, नगर पालिका नगर निगम जिला प्रशासन को भेजती है, जिसे जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजा जाता है, और यम द्वितीया मेले को राजकीय मेला बनाने का प्रस्ताव भी मथुरा वृन्दावन नगर निगम बोर्ड द्वारा करना है, श्री चतुर्वेदी ने नगर निगम मथुरा वृन्दावन से आर टी आई के तहत जानकारी मांगी कि आजादी से अब तक मथुरा वृन्दावन नगर निगम /मथुरा पालिका परिषद द्वारा यम द्वितीया पर्व को लेकर कोई प्रस्ताव शासन को भेजा गया,?जिसके जबाब में निगम प्रशासन ने अवगत कराया कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया, ततपश्चात् गोपाल चतुर्वेदी, ने निगम मथुरा वृन्दावन मेयर / नगर आयुक्त को पत्र लिख कर यम द्वितीया पर्व को राजकीय मेला घोषित करने की मांग की, लेकिन अभी तक बोर्ड बैठक न हो पाने के कारण इस दिशा में कोई कार्यवाही नहीं हुई, सब कुछ ठीक रहा तो 16 अप्रैल को निगम बोर्ड बैठक होगी, खबर है कि उसमें केवल निगम के वित्तीय मामलों पर चर्चा होगी, मतलब साफ है कि भाई बहिन के इस महापर्व यम द्वितीया को राजकीय मेले का दर्जा दिलाने का दायित्व निगम के उन सत्तर पार्षद और मेयर विनोद अग्रवाल के उपर है जोकि लाखो बहिन और भाई के वोट से विजय हासिल कर चुके है, अब देखना कि वे इस दिशा में अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कब तक और कैसे करते है,? क्योंकि अतीत में भी भाजपा पालिका से लेकर निगम तक सर्वाधिक मर्तबा काबिज रही है लेकिन इस मसले से अनजान रही,और फिलहाल बोर्ड भी भाजपा बहुमत का है, तब फिर इस सनातनी हितो की रक्षक मानी जाने वाली पार्टी को इस सनातनी महापर्व यानि यम द्वितीया पर्व को राजकीय सम्मान की सुध अब तक क्यों नहीं आई,? जबकि बौद्ध धर्म की अनुयायी कही जाने वाली बसपा ने गोवर्धन मुड़िया पूर्णिमा मेले को राजकीय मेला घोषित करवा दिया, बहरहाल अभी तक की स्थिति पर ये कहना गलत न होगा कि यम द्वितीया पर्व को राजकीय मेला घोषित करवाने में नगर निगम ही अड़ंगा बनी हुई है,

