धर्म नगरी में छिपे हजारों बंगलादेशी,सतर्कता जरूरी
मथुरा, युगों-युगों से सनातन धर्म की ज्योति जलाए रखने वाली पवित्र भूमि, आज एक ऐसे गंभीर संकट के मुहाने पर खड़ी है, जो न केवल इसकी धार्मिक पहचान को धूमिल कर सकता है, बल्कि इसकी सामाजिक ताने बाने को भी छिन्न-भिन्न कर सकता है। चौंकाने वाले और भयावह दावों के अनुसार, हजारों बंगलादेशी घुसपैठिए इस धर्म नगरी में न केवल अवैध रूप से प्रवेश कर चुके हैं, बल्कि उन्होंने हमारी पवित्र वेशभूषा, सनातनी पहचान को भी छलपूर्वक धारण कर लिया है। यह घुसपैठ, पश्चिम बंगाल से बृज क्षेत्र में आने वाले भोले-भाले श्रद्धालुओं की आड़ में एक सुनियोजित तरीके से अंजाम दी जा रही है, जिसने स्थानीय निवासियों के हृदय में गहरी चिंता, आक्रोश और अविश्वास की भावना को जन्म दिया है।
खबरों और स्थानीय चर्चाओं की मानें तो, इन संदिग्ध और अवांछित तत्वों ने मथुरा के उन इलाकों में अपनी जड़ें जमानी शुरू कर दी हैं, जिनकी धार्मिक और सामाजिक संरचना अपेक्षाकृत कमजोर है। कोसी,शेरगढ़ बाजना छाता, फरह, नोहझील, बाजना, मांट राया और महावन मगोरा जैसे क्षेत्रों में ये घुसपैठिए मुस्लिम बस्तीयों में अपनी मूल इस्लामिक पहचान को बरकरार रख रह रहे हैं,तो वहीं, वृन्दावन और गोवर्धन बरसाना बलदेव गोकुल मथुरा जैसे सनातन धर्म के केंद्र माने जाने वाले पवित्र क्षेत्रों में, इन्होंने साधु, सन्यासी और सनातन धर्म के अनुयायियों का पाखंडपूर्ण चोला ओढ़ लिया है। यह दुस्साहस न केवल करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाओं का घोर अपमान है, बल्कि हमारी सदियों पुरानी सांस्कृतिक और सामाजिक संरचना के लिए भी एक गहरा और दीर्घकालिक खतरा है। और सामाजिक ताने बाने के लिए बड़ा संकट भी, ये हालात एक ऐसा ज्वलंत प्रश्न है, जो हर जागरूक नागरिक के मन में कौंध रहा है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर यह घुसपैठ कैसे संभव हुई? क्या हमारी सीमा सुरक्षा एजेंसियां अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में विफल रहीं? क्या स्थानीय प्रशासन गहरी नींद में सोया रहा, या फिर किसी अदृश्य और शक्तिशाली षडयंत्र के तहत इन अवांछित तत्वों को हमारी पवित्र भूमि पर घुसपैठ करने की खुली छूट दे दी गई? यह स्थिति न केवल हमारी आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में एक गंभीर और अक्षम्य चूक को उजागर करती है, बल्कि यह भी संदेह पैदा करती है कि कहीं न कहीं कुछ निहित स्वार्थी तत्व, जो राष्ट्रविरोधी मंसूबे पाले हुए हैं, इन घुसपैठियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षण और सहायता प्रदान कर रहे हैं।
अब वह समय बीत चुका है जब प्रशासन मूकदर्शक बनकर इस गंभीर स्थिति को नजरअंदाज करे, सिर्फ औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए जांच के आदेश जारी करने या लीपापोती करने से इस समस्या का समाधान नहीं होने वाला है। आवश्यकता है एक तत्काल, निर्णायक और पारदर्शी कार्रवाई की। जरूरत है एक ऐसे तेज-तर्रार, निष्ठावान और निष्पक्ष समूह के गठन की, जो बिना किसी राजनीतिक दबाव या पूर्वाग्रह के, जनता के बीच जाकर इन धोखेबाजों और राष्ट्रविरोधी तत्वों की पहचान कर सके। इस जटिल और संवेदनशील कार्य में, पश्चिम बंगाल से आए हुए उन जागरूक और जिम्मेदार नागरिकों की सहायता लेनाजरूरी होगा जो इन नकली सनातनियों के संदिग्ध तौर-तरीकों, उनकी अपरिचित भाषा और उनकी बनावटी वेशभूषा से भलीभांति परिचित हो सकते हैं।
मथुरा की जागरूक और धर्मपरायण जनता अब और अधिक इंतजार करने के मूड में शायद नहीं है। यह केवल भूमि का अतिक्रमण या सामान्य अपराध का मामला नहीं है, बल्कि यह हमारी आस्था, हमारी सांस्कृतिक पहचान और हमारी सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं के अस्तित्व का सवाल है। यदि प्रशासन अब भी गहरी नींद से नहीं जागता है और जल्द ही कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाता है, तो स्थिति और भी भयावह और अनियंत्रित हो सकती है। साथ ही हमारी धार्मिक सद्भावना और सामाजिक समरसता को खतरे में डाल सकती है, इसके आलावा, स्थानीय संसाधनों पर भी भारी दबाव डालेगी और अपराध के ग्राफ को तेजी से ऊपर ले जाएगी, जिससे मथुरा की शांति और समृद्धि खतरे में पड़ जाएगी। उत्तर प्रदेश की संवेदनशील और कर्तव्यनिष्ठ सरकार इस अत्यंत गंभीर और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता दे,और तत्काल एक उच्च स्तरीय विशेष कार्य बल (Special Task Force) का गठन किया जाए, जिसके पास इन सनातनी वेशधारी घुसपैठियों की जड़ों तक जाने, उनके नेटवर्क को ध्वस्त करने और उन्हें कानून के शिकंजे में कसने के लिए पूर्ण अधिकार और संसाधन मिले हों। मथुरा की इस पवित्र भूमि को इन धोखेबाजों और राष्ट्रविरोधी तत्वों से मुक्त कराना यूपी सरकार की प्राथमिकता में शामिल करना आवश्यक होगा, हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत युगों-युगों तक सुरक्षित और अक्षुण्ण बनी रहे। इसके लिए ठोस प्रयास आवश्यक है, अब निष्क्रिय रहने या मामले को टालने का समय नहीं है, यह त्वरित और निर्णायक कार्रवाई का समय है! अगर अब भी हमने चुप्पी साधी, तो इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा।
धर्म नगरी में घुसपैठ का काला साया, बृज में छिपे बंगला देसी!!!!