पिछले 20 वर्षों में मथुरा की जनता से कई बड़े वादे किए गए थे, जिनमें से कई अब भी अधूरे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि किसने क्या वादा किया, और क्या वादे पूरे नहीं हुए:
- यमुना नदी की सफाई और पुनर्जीवन: 2000 के दशक की शुरुआत में तत्कालीन सरकारों ने यमुना सफाई के लिए योजनाएं बनाई थीं। 2014 में केंद्र सरकार ने ‘नमामि गंगे’ के तहत यमुना की सफाई का वादा किया, लेकिन आज भी नदी का पानी प्रदूषित है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की योजनाएं आधी-अधूरी हैं, और कचरा निस्तारण की समस्या बनी हुई है।
- बुनियादी ढांचे का विकास: 2003 में राज्य सरकार ने मथुरा-वृंदावन को ‘हेरिटेज सिटी’ बनाने का प्रस्ताव रखा था। बाद में 2017 में स्मार्ट सिटी परियोजना की बात हुई, लेकिन आज भी कई सड़कें अधूरी हैं। रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण का वादा बीजेपी सरकार ने 2019 में किया था, लेकिन कार्य धीमा है।
- स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार: 2005 में मथुरा के लिए एक बड़े सरकारी अस्पताल की घोषणा की गई थी, और 2020 में एक मेडिकल कॉलेज बनाने की बात हुई। लेकिन अभी भी स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं, और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग दूर शहरों में इलाज के लिए मजबूर हैं।
- शिक्षा और युवाओं के लिए अवसर: 2009 में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने का वादा किया गया था, लेकिन जमीन अधिग्रहण की दिक्कतों के चलते योजना ठप हो गई। 2018 में भी उच्च शिक्षा के लिए नए संस्थानों की घोषणा हुई, लेकिन अमल नहीं हुआ।
- रोज़गार और स्थानीय व्यापार को समर्थन: 2004 में कांग्रेस सरकार ने स्थानीय हस्तशिल्प और दुग्ध उद्योग को बढ़ावा देने की योजना बनाई थी। 2016 में स्थानीय उद्योगों के लिए सब्सिडी देने की बात हुई, लेकिन कई व्यापारियों को इसका लाभ नहीं मिला।
- पर्यटन सुविधाओं का उन्नयन: 2002 से लगातार हर सरकार ने गोवर्धन, बरसाना, और गोकुल जैसे पवित्र स्थलों को विश्व स्तरीय बनाने की बात कही है। 2021 में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बजट आवंटित हुआ, लेकिन बुनियादी सुविधाएं आज भी अधूरी हैं।
- सुरक्षा और कानून व्यवस्था: 2012 में महिलाओं की सुरक्षा के लिए ‘महिला हेल्पलाइन’ और 2018 में ज्यादा पुलिस चौकियां बनाने का वादा हुआ था। लेकिन इनका क्रियान्वयन सीमित रहा है, जिससे स्थानीय लोग खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।

मथुरा की जनता ने इन वादों के भरोसे सरकारों पर विश्वास किया था, लेकिन अधूरी योजनाओं और धीमी प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण वे खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं। लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में सरकार इन मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान देगी और मथुरा को वह सम्मान और सुविधाएं मिलेंगी, जिसकी वह हकदार है।