IPS श्लोक कुमार: ओवरकॉन्फिडेंस से फेलियर तक और फिर सफलता की कहानी
मथुरा। हाल ही में मथुरा जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के पद पर तैनात किए गए 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी श्लोक कुमार की कहानी न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि युवाओं के लिए एक मिसाल भी पेश करती है। कभी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन में काम करने वाले श्लोक ने ओवरकॉन्फिडेंस से मिली असफलता को पीछे छोड़ते हुए देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा – आईपीएस – में प्रवेश पाया।
शुरुआत पटना से, प्रेरणा पिता से
श्लोक कुमार मूल रूप से पटना, बिहार के रहने वाले हैं। उनके पिता सुधीर कुमार बिहार कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। पिता को देख उन्होंने भी सिविल सेवा में जाने का मन बनाया। बीआईटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) में नौकरी मिल गई।
ओवरकॉन्फिडेंस बना राह की रुकावट
IOC में काम करते हुए उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की, लेकिन पहले दो प्रयासों में प्रीलिम्स परीक्षा में असफल रहे। श्लोक बताते हैं कि उन्हें यह लगता था कि अगर वे इंटरनेशनल स्तर की परीक्षा पास कर चुके हैं, तो यूपीएससी आसान होगी। लेकिन लगातार असफलता ने उन्हें जमीनी हकीकत से रूबरू कराया।
सफलता का सफर
दोस्तों की हिम्मत और आत्ममंथन के बाद उन्होंने तैयारी जारी रखी। नौकरी के साथ सीमित समय में पढ़ाई करते हुए उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में सफलता पाई और 2013 में उनका चयन आईपीएस के लिए हो गया। उनका इंटरव्यू करीब 45 मिनट चला था।
ट्रेनिंग में बदलाव की कहानी
हैदराबाद स्थित इंडियन पुलिस अकादमी में ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने न केवल शारीरिक रूप से खुद को बदला (90 किलो से 70 किलो वजन किया), बल्कि मानसिक रूप से भी परिपक्वता हासिल की। श्लोक बताते हैं कि ट्रेनिंग के दौरान मर्डर और रेप जैसे केसों के सीन बनाकर उनसे जांच करवाई जाती थी, जिससे उनकी जाँच क्षमता विकसित हो सके।
पदस्थापनाएं और अनुभव
श्लोक कुमार ने आगरा में एएसपी (सदर) के पद से अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद वह गाजियाबाद में एसपी सिटी, फिर रायबरेली में एसपी रहे। अब उन्हें शासन द्वारा मथुरा का नया एसएसपी नियुक्त किया गया है।
युवाओं के लिए संदेश
श्लोक का कहना है कि नकारात्मक सोच से दूरी बनाए रखना सबसे जरूरी है। असफलताओं से डरें नहीं, बल्कि उनसे सीखें। उनके अनुसार, “जब तक खुद पर विश्वास है, तब तक कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।”